Tuesday, 6 October 2009

हास्य के चार छंद ............ ! !

पिताजी ने बेटे को बुलाया पास में बिठाया,
बोले आज राज की मैं बात ये बताऊंगा।
शादी तो है बरबादी मत करवाना बेटे,
तुमको किसी तरह मैं शादी से बचाऊंगा।
बेटा मुस्कुराया बोला ठीक फरमाया डैड,
मौका मिल गया तो मैं भी फर्ज ये निभाऊंगा।
शादी मत करवाना तुम कभी जिन्दगी में,
मैं भी अपने बच्चों को यही समझाऊंगा।

2
एक नए अखबार वाले सर्वे कर रहे थे
मैंने कहा मैं भी खूब अखबार लेता हूं
जागरण, भास्कर, केसरी ओ हरिभूमि
हिन्दी हो या अंगरेजी सबका सच्चा क्रेता हूं
पत्रकार बोला इतनों को कैसे पढ़ते हैं
मैंने कहा ये भी बात साफ कर देता हूं
पढ़ने का तो कोइ भी प्रश्न ही नहीं है साब
मैं कबाड़ी हूं पुराने तोलकर लेता हूं

3
एक हास्य कवि जी के पास एक नेता आया
बोला हॅंसाने की कला हमें भी सिखाइए
कवि ने कहा कि योगासन है अलग मेरा
सुबह सुबह चार घंटे आप भी लगाइए
बुद्धि तीव्र हो जाएगी नाचने लगेगा मन
सीख लीजिए ना व्यर्थ समय गवांइए
नेताजी ने कहा कविराज बतलाओ योग
कवि बोला यहां आके मुर्गा बन जाइए

4
जीवन का किसी क्षण कोई भी भरोसा नहीं
जोखिम ना आप यूं अकेले ही उठाइए
सबसे सही है राह फैलाए खड़ी है बांह
बीमा कम्पनी को इस जाल में फंसाइए
पति पत्नी से बोला फायदे का सौदा है ये
प्रिय आप भी जीवन बीमा करवाइए
पत्नी बोली करवा रखा है आपने जनाब
उससे कोई फायदा हुआ हो ता बताइए
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Thursday, 17 September 2009

अकाउंटिंग के अध्यापक का प्रेम पत्र

नए नए Accounting के प्राध्यापक
स्वयं के प्यार में हिसाब किताब भर बैठे
और उसी से प्रभावित होकर ये गलती कर बैठे
की सारा का सारा मसाला
दिल की बजाय, दिमाग से निकाला
और ये पत्र लिख डाला
लिखा था -
प्रिय ! मैं जब भी तुमसे मिलता हूँ "Share Premium" की तरह खिलता हूँ
सचमुच तुमसे मिलकर यूँ लगता है
गुलशन में नया फूल खिल गया
या यूँ कहूं, किसी उलझे हुए सवाल की "Balance Sheet" का "Total" मिल गया
मेरी जान जब तुम शरमाती हो
तो मुझे "Profit & Loss" के "Credit Balance" सी नजर आती हो
तुम्हारा वो "Income Tax Officer" भाई जो "31 st March" की तरह आता है
मुझे बिलकुल नहीं भाता है
उसकी शादी करवाकर घर बसवाओ
वर्ना घिस-घिस कर इतना पछतायेगा
एक दिन "Bad Debt" हो जाएगा
और कुछ मुझे भी संभालो "Fixed Asset" तरह जिन्दगी में ढालो
अपने "Scrap Value" के नजदीक आते माँ बाप को समझाओ
किसी तरह भी मुझे उनसे मिलवाओ
उन्हें कहो तुम्हे किस बात का रोना है
तुम्हारा दामाद तो खरा सोना है
और तुम्हारा पडोसी पहलवान जो बेवक्त हिनहिनाता है
उसे कहो मुझे "Live Stock Account" बनाना भी आता है
"Higher Accountancy" की किताब की तरह मोटी
और उसके अक्षरों की तरह काली
वो मेरी होने वाली साली जब भी मुस्कुराती है
मुझे "Risky Investment" पर "Interest Rate" सी नजर आती है
सच में प्रिय दिल में गहराई तक उतर जाती हो
जब तुम "Suspense Account" की तरह मेरे सपनों में आती हो
ये पत्र नहीं मेरी धड़कने तुम्हारे साथ में हैं
अब मेरे प्यार का "Debit-Credit" तुम्हारे हाथ में है
ये यादें और ख्वाब जब मदमाते हैं
तो जिन्दगी के "Trial Balance" बड़ी मुश्किल से संतुलन में आते हैं
जानता हूँ मुझसे दूर रहकर तुम्हारा दिल भी कुछ कहता है
मेरे हर आँसू का हिसाब तुम्हारी "Cash Book" में रहता है
और गिले शिकवे तो हम उस दिन मिटायेंगे
जिस दिन प्यार का "Reconcilation Statement" बनायेंगे
और हाँ ! तुम मुझे यूँ ही लगती हो सही
तुम्हे किसी "Window Dressing" की जरूरत नहीं
मुझे लगता है तुम्हारा जहन किसी और आशा में होगा
"Auditing" सीख रहा हूँ,
अगला ख़त और भी सरल भाषा में होगा
मैंने "Slip System" की पद्धति दिमाग में भर ली है
और तुम्हारे कॉलेज टाइम में लिखे एक सो पच्चीस लव लेटर्स की "Auditing" शुरू कर दी है
अब समझी !
मैं तुम्हारी जुदाई से "Insolvancy" की तरह डरता हूँ
मेरी जान मैं तुम्हे "Bonus Shares" से भी ज्यादा प्यार करता हूँ
तुम्हारी यादों में मदहोश होकर जब भी "Board" पर लिखने के लिए "Chalk" उठाता हूँ
"Ledger Performa" की जगह तुम्हारी तस्वीर बना आता हूँ
मैं तुम्हारे अन्दर अब इतना खो गया हूँ "Non Performing Asset" हो गया हूँ
अब पत्र बंद करता हूँ कुछ गलत हो तो "अपवाद के सिद्धांत" को अपनाना
कुछ नाजायज़ हो तो "Money Measurement Concept" से परे समझकर भूल जाना
"Consistency" ही जीवन का आधार होता है
और जिन्दा वही रहते हैं जिन्हें किसी से प्यार होता है
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Sunday, 23 August 2009

राजेश चेतन काव्य पुरस्कार 2009


अरुण अद्‍भुत को राजेश चेतन काव्य पुरस्कार, सम्मान पत्र प्रदान करते हुए वन पर्यटन मंत्री किरण चौधरी, साथ में हैं कवि राजेश चेतन एवं सांस्कृतिक मंच के महासचिव जगत नारायण भारद्वाज (सबसे दायें)
भिवानी।हरियाणाशनिवार ८ अगस्त की शाम सांस्कृतिक मंच, भिवानी द्वारा राज्य स्तरीय राजेश चेतन काव्य पुरस्कार समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। समारोह में वन पर्यटन मंत्री किरण चौधरी मुख्य अतिथि थीं। कार्यक्रम में राजेश चेतन काव्य पुरस्कार चरखी दादरी के ओजस्वी युवा कवि अरुण मितल 'अद्‍भुत' को प्रदान किया गया। अरुण अद्‍भुत को यह पुरस्कार उनकी साहित्यिक प्रतिभा तथा साहित्य के प्रति उनके अप्रतिम समर्पण के लिए दिया गया। ग़ौरतलब है हरियाणा राज्य के युवा कवियों को प्रोत्साहित करने हेतु इस पुरस्कार को दिये जाने की शुरूआत वर्ष 2006 में हुईं। अद्‍भुत से पहले, डॉ रमाकांत शर्मा, गीतकार, भिवानी (2006), विपिन सुनेजा 'शायक', गजलकार एवं गीतकार, रेवाडी (2007), योगेन्द्र मौदगिल, हास्य व्यंग्य कवि एवं गजलकार, पानीपत (2008) यह पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। राजेश चेतन काव्य पुरस्कार हरियाणा राज्य के उस कवि को दिया जाता है जिसका काव्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा हो। जो काव्य पाठ में समर्थ, समाज व राष्ट्र के लिए समर्पण भाव वाला हो। इस पुरस्कार में मंच की ओर से 5100 रु॰, शाल, प्रतीक चिन्ह व प्रशस्ति पत्र प्रदान किये जाते हैं। यह पुरस्कार प्रति वर्ष कवि राजेश 'चेतन' के जन्मदिवस पर 8 अगस्त को आयोजित कवि सम्मेलन में दिया जाता है। सम्मान समारोह के बाद कवि सम्मेलन में अलग-अलग अंदाज में कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की और वर्तमान व्यवस्था पर जमकर कटाक्ष किए। पुरस्कार समारोह के बाद एक भव्य कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रख्यात कवियों ने काव्य पाठ किया। वैसे मंच पर युवा कवियों की प्रस्तुतियों को विशेष रूप से सराहा गया। कवि सम्मेलन की शुरूआत दिल्ली के कवि हरमिंदर पाल की 'जिगर माँ बड़ी आग है' कविता को श्रोताओं ने खूब पसंद किया-

आज आम आदमी की पेट की आग
इस तरह जल रही थी
की उसके सामने जिगर की आग बुझ गयी थी
आज इंसान जिगर की आग में नहीं
पेट की आग के लिए भाग रहा है
और अपने परिवार की पेट की आग मिटने के लिए
दिन का चैन खो रहा है और रातों में जाग रहा है
अध्यक्षीय संबोधन प्रस्तुत करते हुए एवं गजलें पढ़ते हुए चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के सचिव माधव कौशिक
ओजवान युवा हस्ताक्षर कलाम भारती ने आतंकवाद, मजहब की लड़ाई पर करारा प्रहार किया उनकी कविता की पंक्तियां थीं
मंदिरों में गूंजते है पुण्य स्वर आरती के,
मज्जिदों में होती है पवन अजान है।
शुभ हो जाता प्रभात गिरजा की घंटियों से
गुरूद्वारे देते गुरुओं का दिव्य मान है।
गीता, पुराण, बाइबल हो या गुरुग्रंथ
पाते सभी भारत में आदर सम्मान है

काव्य पाठ करते हास्य कवि बागी चाचा
कार्यक्रम में सम्मानित कवि अरुण मित्तल अद्‍भुत ने अपनी कविता 'जो सींच गए खून से धरती' पढ़कर समस्त सभागार को राष्ट्रीयता के रंगों में डुबो दिया। उनकी इन पंक्तियों पर विशेष रूप से श्रोताओं का आर्शीवाद मिला
गांधी, सुभाष, नेहरु, पटेल, देखो छाई ये वीरानी
अशफाक भगत बिस्मिल तुमको, फिर याद करें हिन्दुस्तानी
है कहा वीर आजाद और वो खुदीराम सा बलिदानी
जब लाल बहादुर याद करूं, आँखों में भर आता पानी
उनके इन शेरों को भी खूब दाद मिली :

जो उजालों में मिलेंगे शाम को
वो सुबह जैसा कहेंगे शाम को
इन चिरागों में किसी का है लहू
खुद ब खुद ये जल उठेंगे शाम को

न ही मंजिल रास्ता कोई नही
सच है फिर मेरा खुदा कोई नहीं
है बड़ा ये गावं भी वो गावं भी
तीन रंगों से बड़ा कोई नहीं

वरिष्ठ कवि राजेश चेतन जैन ने अपनी कविता "उसके बस की बात नही" माध्यम से अमेरिका, पाकिस्तान, चीन पर निशाने साधे। उन्होंने इस कविता में राजनेताओं के चरित्र को भी लपेटा और वर्तमान व्यवस्था को बदलने का परामर्श भी दिया। उनकी कविता की कुछ विशेष पंक्तियाँ थी:
बात बात में बात बनाना उनके बस की बात नही।
घर के लोगों को समझाना उनके बस की बात नही॥

जात पात का हाथी लेकर हाथ हिलाना आता है।
उस हाथी पर दिल्ली आना उनके बस की बात नही॥
मनमोहन जी हर चुनाव में पी॰ एम॰ तो बन सकते हैं।
लोक सभा का एम॰ पी॰ बनना उनके बस की बात नही॥

मंच संचालन कर रहे कवि चिराग जैन ने अपनी गजल कुछ इस अंदाज़ में पढ़ी:
जहां हमको जन्नत का मंजर मिला है
वहां तुमको बस पत्थर मिला है,
कोई तेरी रहमत को माने ने माने,
तेरा नाम सबकी ज़ुबाँ पर मिला है।
कवि सम्मलेन का मंच सञ्चालन करते सशक्त युवा हस्ताक्षर चिराग जैन
अनपढ़ माँ नाम की उनकी विशेष कविता ने श्रोताओं का माँ के प्रति नमन कराया। इस कविता अंतिम पंक्तियों ने सचमुच एक अनमोल सन्देश से श्रोताओं के मस्तिष्क को झंकृत कर दिया:

सच ! कोई भी माँ अनपढ़ नहीं होती
सयानी होती है
क्योंकि बहुत सारी डिग्रियां बटोरने के बावजूद
बेटियों को उसी से सीखना पड़ता है
की गृहस्थी कैसे चलानी होती है
दिल्ली की ही व्यंगकार बलजीत कौर तन्हा ने जूतों की महिमा सुनाई उनकी पंक्तियाँ थी-
जूते ने आज पांव में आने से किया इंकार,
बोला तुम कवि हो तो पहले सुनो मेरी पुकार,
नही चाहता किसी पीएम पर डाला जाऊं,
नही चाहता किसी पर डाला जाऊं,
गर चाहते हो मुझे मारना तो मेरी चाहता को समझ जाओ,
जूता उठाना तुम बाद में
पहले कसाव को चौराहे पर लटकाओ।

बलजीत कौर की जिन्दा शहीद कविता में शहीद की माँ और बहन को जिन्दा शहीद मानकर किये हुए प्रयोग से सभागार में उपस्थित सभी श्रोताओं की आँखें नाम हो गयी.

हास्य कवि बागी चाचा ने वर्तमान परिवेश के परीक्षा ढर्रे पर जम कर कटाक्ष किए। उन्होंने राष्ट्र धरम की भी बात की उनकी रचना थी-
तोड़ दे अब जाति ओर धर्म की मचान को,
भूल जा अभी तू गीता और पुराण को,
बट चुकी है यह धरती आज तुकड़ों में बहुत,
धर्म तू बना ने अपना पूरे आसमान को।

उनकी हास्य कविताओं 'जूता', मुर्गासन, पेड़ और पुत्र पर भी लोगों ने खूब आनंद लिया. "जूता कविता की विशेष पंक्तियाँ थी :
एक भ्रष्टाचारी की उतारने को आरती
जूते को पानी में भिगोया
पानी से निकलते ही जूता टप्प टप्प रोया
स्थानीय कवि हनुमान प्रसाद अग्निमुख ने अपनी कविता के माध्यम से पाकिस्तान को दो-दो हाथ करने की चेतावनी दी। उनकी काव्य पाठ के दौरान पंडाल निरंतर तालियों से गूंजता रहा। चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के सचिव माधव कौशिक ने भी सारगर्भित काव्य पाठ कर उपस्थित जनों का मन मोहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता गणेश गुप्ता ने की। इस अवसर पर नगर परिषद चेयरपर्सन सेवा देवी ढिल्लो विशिष्ट अतिथि थी। चन्द्रभान सुईवाला स्वागत अध्यक्ष थे। कवि सम्मेलन के समापन पर सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष डॉ. बीबी दीक्षित, महासचिव जगत नारायण भारद्वाज ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के संयोजक दीवान चंद रहेजा व शशि परमार ने सफल आयोजन के लिए मंच के सदस्य व पदाधिकारियों को बधाई दी। सभी ने युवा कवि अरुण मित्तल अद्‍भुत को सम्मान प्राप्त करने पर बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

अन्य झलकियाँ-

युवा कवि अरुण मित्तल 'अद्भुत' को राजेश चेतन काव्य पुरस्कार, स्मृति प्रतीक भेंट करते हुए नगर परिषद चेयरमैन सेवा देवी ढिल्लो


कवि सम्मलेन के लिए प्रस्तुत युवा कवियों की टोली (बाएँ से) बलजीत कौर 'तन्हा', हरमिंदर पाल, अरुण मित्तल 'अद्भुत', कलाम भारती और चिराग जैन

काव्य पाठ करते हुए युवा कवि अरुण मित्तल 'अद्भुत'
माधव कौशिक जी से गजल पर गुफ्तगू करते युवा कवि चिराग जैन और अरुण 'अद्भुत'

Thursday, 13 August 2009

मुक्तक

दुःख में पीडा में पले जो उसका अभिनन्दन करें
जब जरूरत हो जले जो, उसका अभिनन्दन करें
यूँ तो चलने को सभी चलते हैं जीवन राह पर
भीड़ से हटकर चले जो उसका अभिनन्दन करें

Saturday, 1 August 2009

तेज बनकर सच कलम ...................

तेज बनकर सच कलम के साथ चलना चाहिए
आज वीणावादिनी यह स्वप्न पलना चाहिए
जो मिटा दे हर अँधेरा, कर दे रोशन विश्व को
शारदे माँ ज्ञान का वो दीप जलना चाहिए

Monday, 13 July 2009

युवा कवि अरुण मित्तल 'अदभुत' को चतुर्थ राजेश चेतन पुरस्कार

सांस्कृतिक मंच भिवानी ने निर्णय किया है कि वर्ष 2009 का राजेश चेतन काव्य पुरस्कार युवा कवि श्री अरुण मित्तल "अदभुत" को 8 अगस्त 2009 को भिवानी मे आयोजित कवि सम्मेलन के मंच पर दिया जायेगा। इससे पूर्व ये पुरस्कार श्री रमाकांत शर्मा, श्री विपिन सुनेजा और श्री योगेन्द्र मौदगिल्य को मिल चुका है ।

प्रस्तुत है अरुण मित्तल 'अदभुत' का परिचय -

नाम : श्री अरुण मित्तल "अदभुत"
जन्मस्थान : चरखी दादरी, जिला - भिवानी, हरियाणा
जन्मतिथि : 21-02-1985
शिक्षा : एम॰ बी॰ए॰एम॰फिल॰ पी जी डी आर एम, पी॰एच॰डी॰ (शोधार्थी)।

प्रकाशित रचनायें :

विभिन्न पत्रिकाओं में 200 से अधिक कविताएं, गजलें, लेख,लघुकथाएं, कहानियां आदि प्रकाशित।
अंतरजाल पत्रिका रचनाकार, अनुभूति एवं सृजनगाथा, हिन्द युग्म में कविताएं अवं लेख प्रकाशित।
हिन्दी छंद एवं गज़ल व्याकरण में विशेष निपुणता मुख्यत: छंदबद्ध कविताओ का लेखन।
आकाशवाणी रोहतक एवं जैन टी वी, दिल्ली से काव्य पाठ।
अप्रकाशित महाकाव्य वीर बजरंगी का लेखन।
हिन्दी भवन,दिल्ली में दिशा फाउण्डेशन द्वारा विशेष रुप से युवा कवियों के लिए आयोजित कवि सम्मेलन'दस्तक नई पीढ़ी की' में काव्य पाथ।

सम्मान:
चरखी दादरी अग्रवाल सभा द्वारा अग्रकुल गौरव से सम्मानित।
लायंस क्लब भिवानी द्वारा साधना सम्मान।
मानव कल्याण संघ चरखी दादरी द्वारा साहित्य सेवी सम्मान्।
दिल्ली प्रेस द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित युवा कहानी प्रतियोगिता 2005 में कहानी गलतफहमी को द्वितीय पुरस्कार।
विभिन्न मंचीय प्रतियोगिताओं में लगभग 20 पुरस्कार।
स्थानीय गो्ष्ठियों से लेकर राष्ट्रीय हिन्दी काव्य मंचों से काव्य पाठ।
हिन्दी पद्य साहित्य में नारी विषय पर राष्ट्रीय अधिवेशन में शोध पत्र प्रस्तुत।
हिन्द-यु्ग्म द्वारा आयोजित यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता में फरवरी 2009 के यूनिपाठक सम्मान से सम्मानित।

सम्पर्क:हरियाणा टिम्बर स्टोर
काठ मण्डी, जिला भिवानी
चरखी दादरी - 127306 (हरियाणा)
दूरभाष : 9896168261,9818057205
ईमेल - arunmittaladbhut@gmail.com

source: www.rajeshchetan.blogspot.com

Tuesday, 9 June 2009

रुला गए ना दादा .......................


वो दीपक था
अँधेरी रातों का
बुझ गया दिखाकर राह
वो शमां थी
दीवानी महफ़िल की
थम गयी फैलाकर बाँह
वो था दिनकर अस्त हुआ
करके रोशन धरा
वो महान काव्य चरित्र
जिसने सब में आदर्श भरा
वो गीतों की गुंजन
वो शब्दों की संवेदना
हरदम दिखाएगी राह
चंचल मन को नई कलम को
अब तो केवल हैं
"आँखों में आँसू"
ओठों पर कम्पन
उस महान काव्य मनीषी को
शत शत नमन,
शत शत नमन.......
जिसने सारी जिन्दगी अपनी अनमोल हास्य कविताओं से समस्त हिंदी जगत के श्रोताओं को पेट फाड़ फाड़कर हंसाया वो अकस्मात आँसू देकर हमारे बीच से चला गया और हिंदी काव्य मंचों पर एक ऐसा हास्य व्यंग्य का कीर्तिमान छोड़ गया जिसे नमन करके कवि परिवार स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है ........ उनसे जुडी मेरी एक याद नीचे तस्वीर के रूप में है. दिशा फाउंडेशन द्बारा आयोजित "दस्तक नई पीढी के" प्रथम काव्य उत्सव में डॉ कुंवर बेचैन, अल्हड बीकानेरी और अन्य मच के स्थापित कवियों के साथ और नीचे बैठी हैं १५ युवा कवियों की टोली जिन्हें आदित्य दादा के सामने काव्य पाठ का सौभाग्य प्राप्त हुआ ...............
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