Saturday, 1 August 2009

तेज बनकर सच कलम ...................

तेज बनकर सच कलम के साथ चलना चाहिए
आज वीणावादिनी यह स्वप्न पलना चाहिए
जो मिटा दे हर अँधेरा, कर दे रोशन विश्व को
शारदे माँ ज्ञान का वो दीप जलना चाहिए

3 comments:

Vinay said...

बहुत अनुपम रचना है
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ग़ज़लों के खिलते गुलाब

ओम आर्य said...

behad khubsoorat rachana .....shabd kam pad gaye.....................................................................

Anonymous said...

very nice sir ji for this